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Wednesday, 22 April 2015

जीएसटी पर राज्यों के बीच मोटे तौर पर आमसहमति है: जेटली

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज कहा कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) पर राज्यों के बीच एक मोटी आमसहमति बन चुकी है और जीएसटी लागू करने के लिए संविधान संशोधन विधेयक, संसद विधेयक संसद के चालू सत्र में पारित कराया जाएगा।

जेटली ने उम्मीद जताई कि जीएसटी अगले साल पहली अप्रैल से लागू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि देश भर में एक एकीकृत बाजार तैयार होगा और कर पर कर लगने के दुष्प्रभाव समाप्त होंगे। वित्त मंत्री ने आज यहां जीएसटी की योजना पर राज्यों के वित्त मंत्रियों के साथ बैठक की, जिसमें 18 राज्यों के मंत्री शामिल थे। जेटली ने बाद में संवाददाताओं को बैठक की जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि मोटे तौर पर यह आमसहमति है कि राज्य सरकारें जीएसटी के समर्थन में हैं। काफी काम पहले ही पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार संसद के मौजूदा बजट सत्र में जीएसटी पर संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए आगे बढ़ेगी।

उन्होंने आगे कहा कि अगले कुछ दिनों में मैं इस (जीएसटी विधेयक पर बहस कराने के) संबंध में लोकसभा में नोटिस दूंगा। इस विधेयक को गत दिसंबर में लोकसभा में पेश किया गया था। केंद्र सरकार जीएसटी को लेकर सभी राज्यों की चिंताओं को दूर करने की दिशा में काम कर रही है, ताकि इसको समय से लागू किया जा सके।

केंद्र और राज्य एक नए राजस्व निरपेक्ष दर (आरएनआर) पर भी काम कर रहे हैं, जो फिलहाल 27 प्रतिशत प्रस्तावित है। आरएनआर एक ऐसी दर है, जिस पर राज्यों को मौजूदा वैट या बिक्री कर की जगह जीएसटी लागू करने से राजस्व का कोई नफा-नुकसान नहीं होगा।

आरएनआर का पुनर्आकलन आवश्यक है, क्योंकि फिलहाल इसमें पेट्रोलियम उत्पादों पर लगने वाला कर और राज्यों को एक प्रतिशत का अतिरिक्त जीएसटी लगाने की छूट को शामिल नहीं किया गया। जेटली ने पिछले सप्ताह कहा था कि जीएसटी प्रणाली लागू होने से भारत के सकल घरेलू उत्पाद में एक-दो प्रतिशत तक वद्धि हो सकती है।

जीएसटी केंद्रीय उत्पाद, राज्य के मूल्यवर्धित कर, मनोरंजन कर, चुंगी, प्रवेश शुल्क, विलासिता कर और वस्तु एवं सेवा पर खरीद कर की जगह लेगा। इससे वस्तुओं और सेवाओं का एक राज्य से दूसरे राज्य में हस्तांतरण सहज होगा तथा इंस्पेक्टर राज खत्म होगा और कर पर कर के भार लगाए जाने की मौजूदा व्यवस्थागत बुराई दूर होगी।

अभिव्यक्ति की आजादी के खिलाफ है नेट निरपक्षेता का उल्लंघन : नासकॉम

आईटी उद्योग के संगठन नासकॉम ने नेट निरपेक्षता का पुरजोर समर्थन करते हुए बुधवार को कहा कि इंटरनेट पहुंच में किसी तरह का भेदभाव अभिव्यक्ति की आजादी का उल्लंघन ही है। नासकॉम के अध्यक्ष आर चंद्रशेखर ने कहा, 'डेटा के प्लेटफॉर्मों तक पहुंच, आजादी पर प्रतिबंध के समान ही है क्योंकि मेरी अभिव्यक्ति की आजादी में मेरी आवाज सुने जाने की स्वतंत्रता भी शामिल है। आप कुछ भी कह सकते हैं पर आपकी कोई नहीं सुनेगा। यह अभिव्यक्ति की आजादी नहीं है।' उन्होंने कहा कि नेट निरपेक्षता से एक खुला मैदान तैयार होता है जो कि नवोन्मेष व स्वीकरण को सुगम बनाता है।



चंद्रशेखर को नहीं लगता कि नवोन्मेषी एप्लीकेशन इकोसिस्टम तथा दूरसंचार बुनियादी ढांचे के दोहरे लक्ष्य में कोई विरोधाभास है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नासकॉम उन सभी प्लेटफार्मों के खिलाफ है जो कि शून्य शुल्क योजना सहित मुख्य रूप से भुगतान की किसी योजना के आधार पर इंटरनेट की पहुंच में भेदभाव करते हैं। उल्लेखनीय है कि नेट निरपेक्षता की इस सारी बहस में 'एयरटेल जीरो' केंद्र में है। नेट निरपेक्षता से आशय इंटरनेट पर सब प्रकार के डेटा ट्रैफिक के साथ समान व्यवहार करना है और किसी कंपनी या एप को भुगतान के आधार पर प्राथमिकता देना इस अवधारणा का उल्लंघन माना जाएगा।

इस बार सामान्य से कम रहेगा मानसून

पिछले साल देश के कई हिस्सों में पड़े सूखे और इस साल मार्च में हुई बेमौसम बारिश के बाद अब किसानों के लिए एक बुरी खबर और है। मौसम विभाग ने लगातार दूसरे साल भी मानसून के सामान्य से कम रहने की आशंका जाहिर की है। बारिश कम होने से कृषि बहुल उत्तर पश्चिमी राज्यों और मध्य भारत पर सर्वाधिक प्रभाव पड़ने की आशंका है, क्योंकि देश के अन्य हिस्सों की अपेक्षा इन हिस्सों में वर्षा वैसे ही कम होती है।

विज्ञान एवं प्रौद्यौगिकी तथा अर्थ साइंस मंत्री डा. हर्षवर्धन ने जून-सितंबर के चार महीनों के दौरान होने वाली मानसूनी बारिश के लिए बुधवार को पूर्वानुमान जारी किया। इसके तहत इन चार महीनों में सामान्य के 93 फीसदी बारिश होने की संभावना है। पिछले कई दशकों के आंकड़ों के अनुसार चार महीनों में सामान्य बारिश 890 मिमी होती है लेकिन इस बार यह 827 मिमी तक ही सीमित रह सकती है।

हषवर्धन और मौसम विभाग के अधिकारियों ने कहा कि यह सामान्य से कम बारिश है। इसे सूखा पड़ने जैसी स्थिति नहीं कही जा सकता है। लेकिन उन्होंने कहा कि इस पूर्वानुमान से कैबिनेट सचिवालय और प्रधानमंत्री कार्यालय को अवगत करा दिया गया है ताकि भावी स्थितियों से निपटने के लिए तैयारी की जा सके।

मौसम विभाग द्वारा तैयार पूर्वानुमान के तहत विभिन्न माडलों का इस्तेमाल करते हुए बारिश के सामान्य से 93 फीसदी रहने की संभावना जताई गई है। इसमें माडलीय त्रुटि पांच अंकों की हो सकती है। जिसका मतलब हुआ कि बारिश सामान्य के 88 फीसदी तक भी रह सकती है या 98 फीसदी तक भी हो सकती है।

पूर्वानुमान को एक और बेहतर तरीके से इस प्रकार समझ सकते हैं। बारिश के सामान्य से कम रहने की जो संभावना है वह 68 फीसदी तक है। जबकि सामान्य होने की संभावना महज 28 फीसदी है। सामान्य से अधिक होने की संभावना महज चार फीसदी है। इसलिए जो अंतिम नतीजा निकलता है, वह यही है कि बारिश सामान्य से कम ही होगी।